पलपल इंडिया ब्यूरो, मंडला. चंद्रमा की किरणें शरद पूर्णिमा को अमृत वर्षा के रूप में आरोग्यता प्रदान करती है. लोगों में यह आस्था है रात्रि को छत पर कांसे के बर्तन में खीर रखने से उसमें पडऩे वाले चंद्रमा की किरणों से खीर अमृत के समान हो जाती है. जिसके सेवन से रोग दूर भागते है. इसी आस्था के साथ शुक्रवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया गया. अश्विनी शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के स्नान के लिये दूर-दूर से श्रद्धालु नर्मदा तट तक पहुंचे. सुबह से ही नर्मदा तट व संगम तट में स्नान करने वालों का मेला लगा. ऐसा माना जाता है कि नक्षत्रों के प्रभाव से रात्रि में चंद्रमा की किरणें मानव शरीर पर पड़ती है, जो लाभ पहुंचाती है. जिसके चलते युवाओं ने नर्मदा तट में जागरण, जलविहार किया. सुबह से ही माताओं ने व्रत रखा, रात्रि में नौ देवीयों की पूजा के बाद खोवे से बनी मिठाईयां का प्रसाद  बांटा गया.

जगह -जगह देवी पंडालों में, मंदिरों में खीर के प्रसाद भंडारा किया गया. शहर में स्थापित माता महाकाली की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया. दोपहर के बाद से ही ग्रामीण क्षेत्रों से व नगर की माता महाकाली की प्रतिमायें जुलूस के साथ नजर आने लगी. शहर में कोष्ठा मौहल्ला, कांसकार मौहल्ला, कृषि उपज मंडी, महाराजपुर, रेल्वे स्टेशन से आदि स्थानों से प्रतिमाएं विसर्जन के लिए निकाली गई. शहर की मुख्य गलियों से माता महाकली, माता त्रिपुर सुंदरी, मा मातंगी, मां तारा की भव्य शोभायात्राएं निकाली गई, जो देर शाम मां नर्मदा में विसर्जित की गईं.

शान से निकली मंडी की माता की शोभायात्रा

शरद पूर्णिमा को निकलने वाली झांकियों में विशेष झांकी कृषि उपज मंडी की रही.जिसका इंतजार लोगों को बड़े ही उत्साह व श्रद्धा से रहा लगभग दो बजे 18 चकों के  विशाल ट्राले में माता को विराज मान करा कर झांकी शहर की गलियों से निकली. विशाल शोभा यात्रा में बैंड की थाप के साथ माता के जयकारे वातावरण को गुजंयमान कर रहे थे, तो वहीं डी.जे. के सुमधुर गीत में युवक, युवतियां, बुजुर्ग वर्ग, बच्चे थिरक रहे थे.

माता की शोभायात्रा को देखने समूचा शहर व ग्राम के लोग शहर कि मुख्य गलियों में इक्कठा हुये .माता के दर्शन के लिये लोगों की आखें आस लगाये निहार रही थी.जैसे ही बैंड बाजे की थाप लोगों के कानों में पड़ती जो जहां था वहीं थिरक ने लगता .कोई भी अपने आप को नाचने से  नहीं रोक पा रहा था.शोभायात्रा में मुम्बई से आये कलाकार अपनी अंगुलियों का जादू सड़क में रंगो के साथ बिखेर  रहे थे जो माता के स्वागत के लिये रंगोली डालते और माता की सवारी उस रंगोली को स्वीकार करते निकली .कलाकार ने मुख्य सड़कों पर रंगो का ऐसा जादू बिखेरा जिससे समूचा शहर देखता  रह गया.

वातावरण को गुजांयमान नागपुर के प्रसिद्ध जे.बी.डी.जे.,तीस सदस्यीय धमाल टीम,बैंड टीम कर रही तो वहीं आमानाला की युवक-युवतियों की टोली व प्रदेश स्तरीय लोक नृत्य करते हुये लोगों को नृत्य करने में मजबूर कर रही थी.माता के स्वागत के लिये कोई विशेष धर्म के लोग नहीं थे.सभी माता के भक्त थे,जिसे देख लग रहा था कि माता की विदाई को सभी की आंखे नम है.भक्त माता के उपर फूलों की वर्षा करते हुये वातावरण को जय माता दी के नारे से गुंजया मान कर रही थी.जो जहां खड़ा था वहीं माता का प्रसाद पा रहा था.शहर का वातावरण दशहरा सा लग रहा था.

कृषि उपज मंडी में लगातार 41 वर्षो से स्थापित प्रतिमाएं शहर व  दूर अंचल के लोगों के लिये अपनी भव्यता के साथ  आस्था का केन्द्र होती है.इस वर्ष स्वर्ण मंदिर में माता की भव्य मनोहारी प्रतिमा शरद पूर्णिमा तक लोगों के लिये आस्था का केन्द्र रही.

माता की शोभायात्रा लोगों को अपना आर्शीवाद देते हुये शहर की मुख्य गलियों से गुजरती हुई देर शाम मां नर्मदा के तट पहुंची जहां माता की महा आरती उतारी गई.माता को विदा करने भक्त आतुर थे.परन्तु उनके आश्रु भी नहीं रूक पा रहे थे कि मां उनसे विदा होकर पुन: मां नर्मदा से मिलने जा रहीं है.

माता की प्रतिमा को मां नर्मदा के जल समाहित करते ही पूरा वातावरण कुछ मिनटों के लिये शांत सा हुआ और पुन: ही माता का जयघोष इस शांति को चिरते हुये पूरे वातावरण को गुंजयामान कर गया.