पल-पल इंडिया ब्यूरो, मंडला. दशहरा पर्व पर रावण गगन भेदी अट्टाहास कर अपने दसों सिर उठाकर सीना तानकर वह लोगों को चुनौती दे रहा है कि चलावों मुझ पर अग्निबाण....मेरे धू-धू कर जलते पुतले देखों और खुश होकर घर लौट जाओ सदियों से मुझे जला रहे हो लेकिन मेरा क्या बिगाड़़ा फिर तड़़क-भड़़क के साथ अपने दस सिर ओर बीस भुजाओं सहित पहले से कुछ  ऊंचा-तगड़़ा विशाल काय बनकर मैं सामने आ जाता हूं दरअसल मैं कहीं गया ही नहीं यहीं तुम लोगों के बीच मौजूद हू इस सत्य को स्वीकारों कि आज दशानन बहुरूपी हो गया है वह सर्वत्र व्याप्त है कि रावण इतने अधिक हो गए है कि मारने के लिए राम कहां से लाओगें...?

मेरे सारे गुण-अवगुण अब तुम जान चुके हो दशानन का वध करते-क रते राम थक जाएगे लेकिन वह फिर भी अनेक रूपों में बार-बार सामने दिखाई देता रहेगा वैसे भी बुराई न दिखाई दे तो अच्छाई की कद्र कैसे होगी अंधेरा न हो तो प्रकाश की सत्ता को कौन पहचानेगा.....

आज भी हुआ विसर्जन-

मण्डला नगर में देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला तीन दिनों तक चलता रहता है. इसी के चलते मंगलवार को भी अनेक देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया. इसमें मुख्य रूप से मण्डला नगर की देवी प्रतिमाएं शामिल थीं. नगर की देवी प्रतिमाओं का दशहरा के दिन बहुत कम विसर्जन होता है.ज्यादातर प्रतिमाएं दशहरा के दूसरे दिन विसर्जित की जाती है. इसी वजह से सोमवार को भी देर रात तक देवी प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर चलता रहा.

नम आंखों से की मां की विदाई, प्रशासन के रहे इंतजाम

किसी भी अप्रिय घटना को होनें से रोकनें के लिए पुलिस प्रशासन की चाक चौबंद व्यस्था थी सम्पूर्ण विसर्जन कार्यक्रम प्रशासन की देखरेख में हुआ नगर में दुर्गाविर्सजन शांतिपूर्ण रूप से सम्पन्न हुआ.