पलपल इंडिया ब्यूरो, मण्डला. पर्यावरण से जुड़े लोगों ने आखिरकार यह स्वीकारा है कि मण्डला व आस -पास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध रेत उत्खनन पर नियंत्रण आवश्यक है.सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बावजूद आज भी जिले में रेत उत्खनन का कारोबार जारी है.इस मारामारी में अगर कुछ बिगड़ा है तो सिर्फ नदियों का,नदियों की सांस्कृतिक को समझने की हमें आवश्यकता है.हमने इस दिशा में अभी तक कोई कोशिश नहीं की

रेत को लेकर जहां लोगों के निर्माण कार्य अटके पड़े हैं.वहीं रेत माफिया रातो रात डम्फरों में रेत भर अनयंत्र जिलो में परिवहन कर रहे है सूत्र बताते है कि सर्वोच्च न्यायालय की रोक के बावजूद  जिला मुख्यालय व आस पास के क्षेत्रों में निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है.वहीं आम आदमी रेत के लिये परेशान है आखिर क्यों...? जब जिले की स्वीकृति रेत खादनों से निकासी बंद है तो फिर यह रेत कहां से आ रही है कहीं इन रेत माफियाओं से प्रशासनिक अधिकारी मिले तो नहीं है.और अगर नहीं तो फिर निर्माण कार्यो की जगह पर खनिज अधिकारी क्यों नहीं छापा मारी करते, आखिरकार बम्हनी, ठरका, सतबहनी, बरबसपुर ,मुगदरा ,सिलगी की रेत खदानोंं से मशीनों के जरिये रातो रात रेत डम्फर व ट्रकों में क्यों भरवाई जा रही है.वह रेत कहां जा रही है. क्या प्रशासन इस बात क ा जबाव देगा या फिर निर्वाचन की आड़ में रेत माफिया सर्वोच्च न्यायालय की धज्जियां उड़ाते रहेगें.या सोचनीय विषय है .अगर प्रशासन अपनी इच्छा शक्ति जागृत कर ले तो इन रेत माफियो का शिंकजा कस सकता है.