पलपल इंडिया ब्यूरो, मण्डला. क्षेत्र के विकास के लिए छोटे छोटे जिलो का गठन आवश्यक है. उसी क्रम में आगर मालवा प्रदेश का 51वां जिला बना है और हाल ही में प्रदेश से सटे छत्तीसगढ शासन में दुर्ग जिले को संभाग का दर्जा मिला.

वहीं नैनपुर क्षेत्र जो कि हमेशा से यहां जनप्रतिनिधियों और नेताओं के द्वारा छला गया है जिसका कि नैनपुर से रेलवे डीआरएम आफिस, नैनपुर का रेलवे का स्कूल, केन्द्रीय विद्यालय, कागज का कारखाना, वन विभाग का विदोहन, सिचाई विभाग का डिवीजन आफिस, नैनपुर विधानसभा का खत्म होना और ना जाने क्या नैनपुर से छीना गया.

जब प्रदेश में 2003 में विधान सभा चुनाव चुनाव आये तो सत्ताधारी दल के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने अपने घोषणा पत्र में प्रथम मांग नैनपुर को जिला बनाने की रखी और क्षेत्र में अच्छे मतों से चुनाव जीत कर आये और 5 साल के लिए अपने वादे को भूल गये.

इसी तरह जब 2008 में विधान सभा चुनाव में  प्रदेश के मुखिया ने अपनी जन आशीर्वाद रैली के दौरान जेआरसी मैदान में जनता के सामने अपना वादा दोहराया और कहा कि आप जनता जनार्दन पहले हमारे प्रत्याशी को जिताए तब हम विचार करेगें.

जनता से अपना वादा निभाया और क्षेत्र से सत्ताधारी दल को जिताया लेकिन आज फिर क्षेत्र की जनता के साथ छलावा हुआ और सरकार अपना वादा भूल गयी. नैनपुर के नक्शे पर गौर करें तो आसपास के सिवनी बालाघाट की सीमा से लगे परसवाडा, घंसौर धनौरा, लामता, चांगोटोला, नगरवाडा शिकारा, कहानी केवलारी नैनपुर क्षेत्र से सटे हुये है. यहां के सभी सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक कार्यक्रम में नैनपुर शहर का योगदान रहता है.

लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी और यहां के कर्णधारो की मैं और मेरा के चक्कर में नैनपुर का भला करने में असमर्थ  है. अब देखना है कि किस राजनैतिक दल के  घोषणा पत्र में नैनपुर के भाग्य का सूरज छिपा हुआ है.