नई दिल्ली. आधार नंबर का इंटरनेट से लिया गया प्रिंट (ई-आधार) तथा आधार पत्र का काटा गया हिस्सा भी धारक की पहचान व पते का वैध सबूत है. देश में नागरिकों को विशिष्ट पहचान संख्या या आधार जारी करने का काम यूआईडीएआई के पास ही है. उसने एक बयान में इस बारे में स्थिति स्पष्ट की है.

यूआईडीएआई ने कहा है कि ई-आधार डिजिटल रूप में प्रमाणित दस्तावेज है जिस पर आईटी कानून के तहत एनआईसी द्वारा जारी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करते हुए डिजीटल हस्ताक्षर होते हैं. ई-आधार पर प्रकाशित डेटा, आधार पत्र पर प्रकाशित डेटा के समान ही होता है. इससे आधार पत्र भी वैध दस्तावेज है.

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) ने स्पष्ट किया है कि आधार पत्र (कटा हुआ हिस्सा) और ई-आधार (आधार कार्ड का कंप्यूटर से निकाला गया प्रिंट) दोनों पहचानपत्र और पते के तौर मान्य हैं. इसे वैध दस्तावेज न मानने की शिकायत पर प्राधिकरण ने बयान जारी कर असमंजस की स्थिति को दूर करने का प्रयास किया है.

प्राधिकरण द्वारा जारी बयान के मुताबिक सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉ‌र्ड्स और डिजिटल सिग्नेचर को कानूनी मान्यता दी गई है. लिहाजा, ई-आधार भी आधिकारिक तौर पर मान्य दस्तावेज है, क्योंकि इसमें उपलब्ध तथ्य डिजिटल होते हैं. प्राधिकरण ने लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ई-आधार डाउनलोड करने के लिए रेजीडेंट पोर्टल भी शुरू किया है.

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें : https://portal.uidai.gov.in/ResidentPortal/welcomeLink.action   एवं   http://eaadhaar.uidai.gov.in