पलपलइंडिया ब्यूरो, मंडला. प्रदेश सरकार की 13 सौ करोड़ की महत्वाकांक्षी नर्मदा शुद्घीकरण योजना के तहत नर्मदा उदगम से नदी के दोनों तरफ हरियाली चुनरी के स्वप्न व संकल्प को जिले में बैठे जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी भू-माफियाओं के साथ मिलकर पलीता लगा रहे है. ऐसे में मां नर्मदा को अपने बचपन का झूला मानते हुए बीते दिनो प्रदेश के मुखिया ने नर्मदा शुद्घीकरण का जो संकल्प स्वयं व लोगों को दिलाया था, वह अब चकनाचूर होता नज़र आ रहा है.

जिला मुख्यालय के आसपास लगभग 5-6 किमी की दूरी पर विकास के नाम पर जंगलों व पहाड़ों का सफाया भू-माफिया व छुटभैये नेता मिल-जुलकर कर रहे हैं. लगातार खत्म हो रहे पहाड़ों व जंगलों से पर्यावरण को भी खतरा पहुंच रहा है. जेसीबी मशीन लगाकर ठेकेदार भारी मात्रा में पहाड़ों को खोदकर मुरम शहर में ट्रेक्टर ट्रालियों के मार्फत खुलेआम बिकवा रहे है. जिसकी न तो कोई रायल्टी जारी की जाती है और न ही इस संबंध में खनिज अधिकारी को कोई जानकारी है.

खनिज अधिकारी ने पल्ला झाड़ा

मुरम के संबंध में जब खनिज कार्यालय से जानकारी ली गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. खनिज अधिकारी राजकुमार तोमर ने बताया कि मण्डला में कुल तीन मुरम की खदानें बोरिया, लिमरूआ, माधवपुर स्वीकृत की गई हैं. शहर में इतनी तादाद में मुरम उपलब्ध होने की संबंध में उन्होंने खनिज इंस्पेक्टर की तरफ अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मुझे तो मीटिंग व अन्य कार्यों से फुरसत नहीं मिल पाती इसलिए मैने खनिज इंस्पेक्टर को जिम्मेदारियां सौप दी है. अभिलेख अनुसार अभी तक किसी भी मुरम खदान व ट्रेक्टर ट्रालियों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है, जिससे करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है.

समतलीकरण कर प्लॉटों की बिक्री

सूत्र बताते हैं कि कुछ कद्दावर नेता व भू-माफिया मिल-जुलकर पहाड़ों व जंगलों का सफाया खनिज अधिकारी के साथ मिलकर करवा रहे हैं. पहले तो भू-माफिया पहाड़ो को खोदकर भूमि का समतलीकरण करते है. फिर उसी भूमि पर प्लाट काट-काटकर ऊंचे दामों में विक्रय कर देते हैं.