मंडला.अध्यापक संविदा संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आव्हान पर जारी आंदोलन के 25वें दिन अध्यापकों ने अपना आंदोलन जारी रखा जिला मुख्यालय में कलेक्ट्रेट के बाहर धरना स्थल पर अध्यापकों ने प्रदेश के पूरे 230 विधायकों और 29 सांसदों को संकल्प पत्र लिफाफे में बंद कर प्रेषित किया है.

अध्यापकों ने अपने संकल्प पत्र में कहा है कि हम अध्यापक के परिवार के सभी सदस्य यह स्वीकार करते हैं कि अध्यापकों की समान कार्य समान वेतन की मांग एवं विभाग में संविलियन की मांग पूर्णत: संवैधानिक एवं जायज हैं, इसके विपरीत सरकार द्वारा पिछले 15 वर्षो से भेदभाव करके संविधान का प्र्रतिपल उल्लंघन किया जा रहा है. जो सरकार भारत के संविधान के प्रति अपने कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील नहीं है वो सरकार जनता का भला करेगी संशय है. अत: हम सभी संकल्प लेते हैं कि हम अपने नाते रिश्तेदार और पास पड़ोसियों सहित उन्है प्रेरित करेंगें कि मांगों का समर्थन करने वाले राजनैतिक दल को ही मतदान करेंगें.

मूल्यांकन का बहिष्कार- अध्यापक संविदा संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आव्हान पर संभी अध्यापक एवं संविदा शिक्षक बोर्ड परीक्षा और स्थानीय परीक्षा के मूल्यंाकन कार्य का बहिष्कार करेंगें और आदेश नहीं लेगें. मांगों की पूरी होने तक वार्षिक प्रायोगिक परीक्षा में बाहय परीक्षक और आंतरिक परीक्षक का भी कार्य नहीं करेगें. 22 और 23 मार्च को होने वाले प्रतिभा पर्व का भी अध्यापक, संविदा शिक्षक और गुरूजी बहिष्कार करते हुए मूल्यांकन और सत्यापन के कार्य में भाग नहीं लेंगें.

सरकार हुई संवेदनहीन

अध्यापकों की हड़ताल के 25 दिन पूरे हो गये शिक्षण और परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई हैं बावजूद इसके सरकार के मूक बने रहना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाती है. राज्य अध्यापक संघ के जिला शाखा अध्यक्ष डी.के.सिंगौर ने सरकार की इस संवेदनहीनता पर क्षोभ व्यक्त करते हुये कहा है कि मुख्यमंत्री जी को सिर्फ राज की चिन्ता है राज्य कि नहीं. सरकार ढिढ़़ौरा पीट रही है कि वर्ष 2003 में अध्यापकों के वेतन का बजट 418 करोड़ था और 2013 में बढकर 2982 करोड़ हो गया है सरकार यह बताने का प्रयास कर रही है कि हमने अध्यापकों के हित में 418 करोड़ से 2982 करोड़ का बजट बढ़ाकर उनके वेतन व भत्तों में इजाफा किया है जबकि वास्तविकता यह है बजट में यह वृद्वि मात्र अध्यापकों के वेतन में वृद्वि के कारण नहीं हुई है अपितु अध्यापकों की संख्या 90 हजार से बढक़र ढ़ाई लाख हो जाने के कारण हुई है. सरकार अध्यापकों और संविदा शिक्षकों के वेतन को प्रंशसा स्वरूप बताया है कि सहायक अध्यापक का अधिकत्तम 12450रू. और संविदा शाला शिक्षक श्रेणी 3 का अधिकत्तम 5000रू. हैं जो कि किसी भी चतुर्थ श्रेणी के न्यूनत्तम 15000रू. वेतन से कम है. सरकार यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि है कि हम अध्यापकों के वेतन को सरकारी विद्यालयों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के वेतन को पार करने में अभी सफल नहीं हो पाये हैं.